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बाढ़ में जहरीले जीवों का खौफ, बिजली की आंख-मिचौली ने बढ़ाई ग्रामीणों की चिंता
- दैनिक लोक भारती
- 17 Sep, 2026
अमृतपुर क्षेत्र में शाम होते ही बिजली कटौती से बढ़ रही मुश्किलें, उमस भरी गर्मी के साथ अंधेरे में रात गुजारने को मजबूर ग्रामीण
लक्ष्मी शरण सिंह राठौड़
फर्रुखाबाद l बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक ओर गांवों में बाढ़ का पानी और उससे पैदा हुई दुश्वारियां लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर पिछले कई दिनों से चरमराई बिजली व्यवस्था ने ग्रामीणों की रातों की नींद हराम कर दी है। शाम होते ही बिजली की आंख-मिचौली शुरू हो जाती है और देर रात तक आपूर्ति के आने-जाने का सिलसिला चलता रहता है। ऐसे में उमस भरी गर्मी से बेहाल ग्रामीणों को अंधेरे में रात गुजारने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
बाढ़ के बीच जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
बाढ़ प्रभावित गांवों में इन दिनों जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है। पानी भरने के कारण सांप, बिच्छू समेत अन्य जहरीले जीव-जंतु सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी और घरों की ओर पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में सर्पदंश की घटनाएं सामने आने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। ऐसे हालात में रात के समय बिजली गुल होना ग्रामीणों के लिए महज असुविधा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा से जुड़ी चिंता बन गया है।
एक घंटे बिजली, दो घंटे कटौती से परेशान उपभोक्ता
ग्रामीणों का कहना है कि अमृतपुर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति का कोई निर्धारित क्रम नजर नहीं आता। कभी एक घंटे आपूर्ति मिलने के बाद दो घंटे तक बिजली बंद रहती है तो कई बार रात में लंबे समय तक कटौती का सामना करना पड़ता है। बिजली आने की उम्मीद में ग्रामीण जागते रहते हैं। बिजली गुल होते ही घरों के आसपास अंधेरा छा जाता है और बाढ़ के पानी के बीच जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे को लेकर परिवार के लोग सहमे रहते हैं।
उमस भरी गर्मी में बिजली न रहने से पंखे और कूलर बंद हो जाते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं बाढ़ के कारण पहले से ही जनजीवन अस्त-व्यस्त है। आवागमन, पेयजल, पशुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बीच बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
एसडीओ बोले- कंट्रोल से हो रही इमरजेंसी कटौती
अघोषित बिजली कटौती के संबंध में अमृतपुर बिजली विभाग के एसडीओ से जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में होने वाली बिजली कटौती कंट्रोल से इमरजेंसी कटौती के रूप में की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनपद में जितनी बिजली उपलब्ध कराई जा रही है, उसी के सापेक्ष क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति दी जा रही है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में विशेष व्यवस्था की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की परिस्थितियां सामान्य गांवों से अलग हैं। यहां रात के समय पर्याप्त रोशनी रहना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी है। बाढ़ के पानी के बीच जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे को देखते हुए लगातार बिजली उपलब्ध रहना आवश्यक है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और बिजली विभाग के अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि इमरजेंसी कटौती के दौरान भी बाढ़ प्रभावित गांवों में सुरक्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यथासंभव आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि अंधेरे और जहरीले जीव-जंतुओं के खतरे के बीच लोगों की परेशानी कम हो सके।
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